नारी ही देश को बदल सकती है मग़र हमारा आधा भारत किचन मे खाना बनाता है,
जिस नारी सशक्तिकरण की हम बात करते हैं असल में उसकी शुरुआत मनुस्मृति नमक हिन्दू ग्रंथ के सहन से होती है. जो भारतीय नारी के इतिहास में एक बहुत बड़ी घटना थी. जिस मनुस्मृति में यह लिखा था कि स्त्री सिर्फ लैंगिक संबंधों के लिए बनी है, वह दिनरात मुक्त नहीं रह सकती, स्त्री को स्वतन्त्र रहने का अधिकार नहीं है. हिन्दू कोड बिल भी नारी के जीवन के इतिहास की एक स्मरणीय घटना है. ये दोनों घटनाएँ नारी के जीवन के इतिहास की महत्वपूर्ण तथा स्मरणीय घटना रही हैं. जिनसे उनके जीवन में बहुत बदलाव आया. अन्यथा आज के समय मे नारी मात्र एक संतानोत्पत्ति का साधन बनकर रह जाती. सिर्फ रसोई तक सीमित रहती. अपना सारा जीवन बच्चों को पालने और पति सास ससुर की सेवा मे निकाल देती. नारी का जीवन तबतक स्वतंत्र नहीं है जब तक वो आत्मनिर्भर नहीं हो जाती, जा तक वह आत्मनिर्भरता को प्राप्त नहीं कर लेती. नारी का जीवन किसी और का जीवन नहीं है वह उसका निजी जीवन है, जैसे चाहे वह उसे वैसे जी सकती है. एक नारी जितना सहनशील नर नहीं हो सकता. अगर गहराई से देखा जाए तो नारी के बचपन से जवानी तक जवानी से विवाह तक विवाह से उसके जीवन के अंत तक वह अपना सारा जीवन औरों के लिए लगा देती है. एक बलिदान वह तब कटी है जब वह विवाह के वक्त अपना घर परिवार छोड़कर अपने पति के घर जाती है. जब वह 9 महीने के लिए अपने गर्भाशय में एक जान को रखती है. वह उसका बहुत ही नाजुक समय होता है. इस सब के अलावा वह बहुत शक्तिशाली होती है. मैंने आजतक गाँव शहरों में ल़डकियों के साथ हो रहे भेदभाव को देखा है. जिस समाज मे पुरूष को उसकी हर गलती को माफ़ और नकार दिया जाता है उसी समाज मे स्त्री की कोई भी बात को एक राई का पहाड़ बना दिया जाता है. ल़डकियों के साथ जो अत्याचार होते हैं वो सहती रहती हैं इसलिए कोई बदलाव नहीं आता, क्यूंकि भारत एक ऐसा देश है जहां नारी ही इसको बदल सकती है. जिस देश मे गाय को माता भारत को माता धरती को माता कहा जाता है उसी देश मे नारी के साथ गलत बर्ताव किया जाता है, बलात्कार होते हैं, अत्याचार किया जाता है, तो ये एक दोहरा रवैया दिखाता है. जिस दिन देश की हर महिला आत्मनिर्भर होने का संकल्प उठा लेंगी, अन्याय के प्रति आवाज़ उठाने लगेंगी, तो उस दिन देश में एक बदलाव की शुरुआत होगी. हमारा आधा भारत किचन मे खाना बनाता है और हमारा वही आधा भारत किचन मे खाना बनवाया है. यह स्तिथि है. ल़डकियों का शिक्षित होना बहुत आवश्यक है. ताकि वह भविष्य मे किसी पर निर्भर ना हो. नारी सशक्तिकरण का मतलब सिर्फ कपड़ों से नहीं पर सोच से होना चाहिए, यह हर स्त्री को स्मरणीय होना चाहिए कि आज वो जहां खाड़ी है किसके कारण है क्यूँ हैं. कितने समाज सुधारको ने हमरा जीवन सुधारने के लिए अपने जीवन को बलिदान करदिया. अपना जीवन त्याग कर सब कुछ हमको स्वतंत्र देने मे लगा दिया. हमे यह कभी नहीं भूलना चाहिए. आज के समाज स्त्री ने ऑटो रिक्शा ट्रेन से लेकर वायुयान अन्तरिक्ष तक, विभिन्न क्षेत्रों में अपना अस्तित्व बनाया है. मैं खुद एक महिला हूँ, अंत में यही कहना चाहती हूँ मैं की, मैं किसी की सम्पत्ति नहीं हूँ, मेरे जीवन पर किसी और का अधिकार नहीं है. मेरा अस्तित्व मेरा है, ना पति ना पिता ना भाई मैं किसी की निजी सम्पत्ति नहीं हूँ, मैं खुले गगन में पंख फैलाकर उड़ना चाहती हूँ, आज मैं आज़ाद हूँ. मैं देश के उन सभी समाज सुधारक को झुककर नमन करती हूँ जिन्होंने इस समाज मे मेरा अस्तित्व बनाया जिस वजह से मैं आज इतना कुछ कर पा रही हूं और उनके बारे में कुछ लिख पा रही हूँ इतना काबिल बना दिया उन्होंने मुझे.
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