कौन है वो आखिर??
आकर पास मेरे वो चुपके से कान में धीरे से कुछ कह कर जाता है देखती हूं जब इधर उधर उसको तो पल में ही गायब हो जाता है! कौन है वो आखिर मेरे करीब इतना आकर जो हाल में ही दूर हो जाता है!! कुछ जानी पहचानी महक सी लगती है उसमें कदमों की आहट कुछ पहचानी सी लगती है उसमें यूं तो इस भीड़ भरी दुनिया में कैसे पहचाने हम किसको मगर औरों से हटकर कुछ अलग बात लगती है उसमें! वो अक्सर कुछ कहकर जाता है कौन है वो आखिर ? जो औरों के लिए हमेशा कुछ कर जाता है!! पंछी की तरह कभी उड़कर आता है वो देखा है भेदभाव मैंने इंसानों में पर किसी भी डाल पर बैठ जाता है वो! त्याग बलिदान व दया की मूर्ति जैसा है कौन है वो आखिर ? जो इंसानों में इंसानियत सिखा जाता है!! लोगों की विपदा में उसको फरिश्ता बनते देखा है, मगर इंसानों की बस्ती में रहकर उसको इंसान बनते देखा है! वो कभी साथ छोड़कर नहीं जाता कौन है वो आखिर ? जो नादान को नदी के उस छोर तक ले जाता है!! क्या वो कोई कविता के जैसा है जिसे लिखा जा सके, है क्या कोई कहानी वो जिसे पढ़...